About Virtual Reality And Healthcare Symposium - All You Wanna Know In Hindi By Shubham Chauhan

About Virtual Reality And Healthcare Symposium



वर्चअल रियलिटी और हेल्‍थकेयर साथ-साथ 


मरीजों को तनाव से राहत दिलाने का काम करती है।

सर्जरी और रोग की जांचो में है मददगार।
बढती उम्र की दिक्‍कतों को समझने में सहायक।
भारतीय चिकित्‍सक भी वर्चुअल रियलिटी तकनीक के इस्‍तेमाल मे पीछे नही है। बगलूरू स्थित कैंसर स्‍पेशलिस्‍ट इस तकनीक का इस्‍तेमाल लगभग 400 मरीजों पर कर चुके है। वे कहते है कि इससे उनके मरीजों का दर्द 40 प्रतिशत तक कम हुआ। प्‍लास्टिक सर्जन लक्ष्‍मी सलीम वीआर हेडसेट का इस्‍तेमाल एसिड अटैक पीडितों को तनाव से बाहर निकालने के लिए कर रही है।
 
हेल्‍थकेयर के क्षेत्र में वर्चअल रियलिटी का भी सहारा लिया जा रहा है। मरीजों को इसके जरिए बाहरी दुनिया से जोडकर तनाव में राहत दी जाती है।आपने कभी सोचा है कि ऑपरेशन थिएटर में डॉक्‍टर किस तरह से ऑपरेशन करते है?? कैसा हो जब आप हॉस्पिटल के बिस्‍तर पर लेटे-लेटे पहाडों की सैर कर आएं?? ऑपरेशन थियेटर के अंदर की दुनिया को आप बाहर से देख पाएं??  तो अब यह संभव है वर्चुअल रियलिटी(वीआर) तकनीक के जरिए। इसकी शुरूआत 14 अप्रैल 2016 में हो चुकी है। कैंसर सर्जन डॉ. सैफ अहमद ने पहली बार रॉयल लंदन हॉस्पिटल में हुए सर्जरी को वर्चुअल रियलिटी कैमरे से शूट करवाया। और इस घटना की लाइव स्‍ट्रीमिंग को मेडिकल रियलिटीज बेवसाइट और वीआर ऐप की मदद से लोगों ने देखा। लोगों ने देखा कि किस तरह से डॉ. सैफ कैंसर ट्यूमर को निकालने में कामयाब हुए थे। आज सेहत की दुनिया में वर्चुअल रियलिटी चर्चा में है।क्‍या है वर्चअल रियलिटी-वर्चुअल रियलिटी असल में वह अनुभव है, जो आप तकनीक के जरिए कोई फिल्‍म या टीवी शो देखने वक्‍त करते है। इसमें वीआर तकनीक के जरिए आप किसी भी चीज को हकीकत में अनुभव कर सकते है। इस दौरान आपको ऐसा एहसास कराया जाता है कि आप उस जगह मौजूद है, जहां वह घटनाएं हो रही है। इस आभासी दुनिया कंम्‍प्‍यूटर सॉफ्टवेयर और प्रोग्रामिंग के जरिए विकसित किया जाता है। इसे अनुभव करने के लिए दृष्टि और ध्‍वनि दोनो का ही इस्‍तेमाल होने वाले वीडियो को 360 डिग्री कैमरे से शूट किया जाता है। आप इस कैमरे को अन्‍य किसी एक्‍सेसरीज की तरह यूएबी के द्वारा अपने फोन से कनेक्‍ट कर सकते है। 360 डिग्री कैमरे की मदद से अपने आसपास हो रही गतिविधियों को फोटो या विडियो के रूप में कैप्‍चर कर सकते है। दसअसल, इस तरह के कैमरे में आगे-पीछे दोनों तरु दो वाइड एंगल लेंस लगे होते है। 360 डिग्री वीडियो को देखने के लिए आपको वीआर हेडसेट की जरूरत होती है।मरीजों के लिए आरामदायक मेडिकल वीआर-लॉस एंजल्‍स के सेडार्स हॉस्पिटल के डॉ. ब्रेनन स्‍पीगल ने अपनी टीम के साथ मिलकर गंभीर रूप से बीमार मरीजों को आराम महसूस कराने के लिए एक अनोखा तरीका निकाला है। ब्रेनन ने अपने मरीजों को वी-आर हेडसेट से उनकी रूचि के हिसाब से 360 डिग्री वीडियों दिखाए।उन्‍होनें इस तकनीक के जरिए मरीजों को  मुख्‍यत:  उनकी पसंदीदा जगहो पर घूमने के अनुभव करवाए। साथ ही कला के शौकीनों को मशहूर कला प्रदशर्नी के 360 डिग्री वीडियो दिखाए गए। इस प्रयोग के परिणाम सकारात्‍मक निकले। पीडितों की हालात में सुधार देखा गया । तनाव में भी कमी आई।

जादू की तरह-

बच्‍चों को अधिक समय तक किसी एक जगह पर रोक पाना मुश्किल है। और जब बात हॉस्पिटल में रहने की हो( तो फिर असंभव है। बच्‍चों को अस्‍पताल भी घर सा लगे, इसके लिए एक डच कंपनी विजिट यू ने स्‍मार्टफोन और वर्चुअ ग्‍लासेज की मदद से बच्‍चों को उनके घर, स्‍कूल या किसी खास आयोजन से 360 डिग्री कैमरा के द्वारा सीधे जोडने में मदद करती है। ऐसे में अस्‍पताल में रहते हुए भी बच्‍चे अपनी रोजमर्रा की चीजों से जुडे रहते है।

हादसे से उभरने में मददगार-

ऐसे मरीज जो किसी जटिल मानसिक रोग से उभरने की कोशिश कर रहे है या फिर जिनके शरीर का कोई अंग काम नही कर रहा, उनके लिए माइंड मेज नाम की कंपनी ‘ माइंड मोशन प्रो वीआर हेडसेट’ लेकर आया है। इसकी मदद से वे मरीजों को अपने अंगो को नियंत्रित करने का प्रसाय कराती है। हालांकि, इस अभ्‍यास से हकीकत में मरीजों के अंग नहीं हिलते, पर इससे उनकी एकाग्रता बढती है। वे प्रोत्‍साहित भी होते है। ऐसे अभ्‍यास से मरीजों के नर्वस सिस्‍टम को ठीक होने में कम समय लगता है।

बुढापे की परेशानियों को समझना आसान-

चिकित्‍सा की पढाई करने वाले विद्यार्थियो के लिए शिकागों स्थित एम्‍बोडिड लैब ने एक ऐसा वीडियो तैयार किया है, जिससे एक बुजुर्ग व्‍यक्ति की परेशानियों को समझा जा सके। दरअसल, 360 डिग्री वीडियो को इस तरह शूट किया गया है, जिसमें इसे देखने वाले के हाथों की गतिविधियां एक बुजुर्ग व्‍यक्ति जैसी प्रतीत होती है। मतलब, वीआर हेडसेट पहनने वाले के हाथ वह देख तो पाता है, लेकिन उसके हाथ काफी धीमे काम करते है। इस तकनीक के जीिए मेडिकल के विद्र्या‍थी गुजुगो की समस्‍याओं को समढ पाएंगे। उनके लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया करा पाएंगे।

जांच के लिए जरूरी-

सालों से वर्चुअल रियलिटी स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में बीमारियों की जांच के लिए इस्‍तेमाल होती आ रही है। एमआरई, एक्‍स-रे, श्रकैन और ब्‍लड टेस्‍ट आदि में इसी तकनीक का सहारा लिया है जाता है। यह समय बचाती है। जटिल ऑपरेशन को आसान बनाती है।

रोबोटिक सर्जरी है भविष्‍य-

स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में वर्चुअल रियलिटी की चर्चा सबसे ज्‍यादा रोबोटिक सर्जरी के कारण ही होती है। इस तरह की सर्जरी में रोबोटिक डिवाइसेज को सर्जन के प्रशिक्षण में भी किया जाता है।

फिटनेस ट्रेनिंग को बनाए मजेदार-

आज यू-ट्यूब पर ढेरों 360 डिग्री फिटनेस रूटीन वीडियो मौजूद है। जब आप वीआर हेडसेट पहनकर इन वीडियोज को देखते हुए एस रूटीन को फॉलो करते है, तो खुद को उस फ्रेम में महसुस करते है। साथ ही सही एंगल और पोस्‍चर को अच्‍छे से समझ पाएंगे। अगर आप जिम में एक्‍सरसाइज करने को मजेदार बनाना चाहते है, तो वीआर हेडसेट के इस्‍तेमाल से किसी समुद्री किनारे या पहाड पर व्‍यायाम करने का अनुभव ले सकते है।
About Virtual Reality And Healthcare Symposium About Virtual Reality And Healthcare Symposium Reviewed by Shubham Chauhan on 3:22 pm Rating: 5

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